➤ निजी स्कूलों की मनमानी फीस रोकने के लिए एक्ट में संशोधन की तैयारी
➤ हर साल बढ़ती फीस से परेशान अभिभावकों को मिलेगी राहत
➤ 25% गरीब छात्रों के दाखिले के नियम को सख्ती से लागू करेगी सरकार
हिमाचल प्रदेश में निजी स्कूलों की मनमानी फीस को लेकर लंबे समय से उठ रही शिकायतों के बीच अब सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रदेश सरकार हिमाचल प्रदेश प्राइवेट एजुकेशन रेगुलेशन एक्ट 1997 में संशोधन करने की तैयारी कर रही है, जिससे निजी स्कूलों की फीस पर सख्त नियंत्रण व्यवस्था लागू की जा सके।
विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने साफ कहा कि सरकार फीस निर्धारण को लेकर एक पारदर्शी और सख्त प्रणाली लागू करेगी। उन्होंने बताया कि हर साल नए शैक्षणिक सत्र से पहले निजी स्कूलों द्वारा फीस बढ़ाने की लगातार शिकायतें मिल रही हैं, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा कानून में निजी स्कूलों की फीस तय करने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, जिसका फायदा उठाकर कई स्कूल मनमाने तरीके से फीस बढ़ा देते हैं। ऐसे में अब सरकार इस खामी को दूर करने के लिए एक्ट में संशोधन करने जा रही है।
सरकार इस दिशा में उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों की फीस नियंत्रण प्रणाली का अध्ययन कर रही है। इन्हीं राज्यों की तर्ज पर हिमाचल में भी एक संतुलित और पारदर्शी फीस स्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा, ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके।
विधानसभा में इस मुद्दे को कांग्रेस विधायक रामकुमार चौधरी ने उठाया। उन्होंने कहा कि कई निजी स्कूल बिना किसी नियमन के फीस वसूल रहे हैं, जिससे खासकर मध्यम और गरीब वर्ग के परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
इसके अलावा सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि निजी स्कूलों में गरीब और कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए 25 प्रतिशत आरक्षण को सख्ती से लागू किया जाएगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत यह प्रावधान पहले से मौजूद है, लेकिन इसका सही तरीके से पालन नहीं हो रहा। अब इसके लिए निगरानी तंत्र को मजबूत किया जाएगा।
सरकार के इस कदम को जहां अभिभावकों के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है, वहीं निजी स्कूलों के लिए यह नियमों का सख्ती से पालन करने का संकेत भी है। आने वाले समय में यह बदलाव प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा असर डाल सकता है।



